जब कोई कंपनी शुरू होती है, तो अक्सर संस्थापक या प्रमोटर कुछ शेयर खुद रख लेते हैं। इस हिस्से को ही प्रमोटर होल्डिंग कहते हैं। इसे समझना मुश्किल नहीं – बस वही हिस्सा जो शुरुआती लोगों के पास रहता है, जैसे आपके बचत खाते में पहला पैसा।
प्रमोटर होल्डिंग का मतलब
प्रमोटर होल्डिंग का सीधा अर्थ है ‘स्थापना करने वालों की हिस्सेदारी’। अगर कंपनी 100 % शेयर जारी करे, तो प्रमोटर को मिल सकता है 30‑50 % या उससे कम भी। इस हिस्से से उन्हें दो चीज़ें मिलती हैं – नियंत्रण और भरोसा। निवेशक देखते हैं कि संस्थापक का हाथ अभी भी कंपनी में है, इसलिए वे अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं।
प्रमोटर होल्डिंग क्यों रखें?
पहला फायदा: निर्णय लेने की ताक़त. जब प्रमोटर के पास पर्याप्त शेयर होते हैं, तो वो बड़ी रणनीतिक चालें खुद चला सकते हैं, बिना बाहरी दबाव के। दूसरा, निवेशकों को आकर्षित करना आसान बन जाता है; उन्हें दिखता है कि संस्थापक का भरोसा कंपनी में बना है। तीसरा, भविष्य में अगर कोई अतिरिक्त फंडिंग चाहिए, तो प्रमोटर अपने हिस्से को बेचकर जल्दी पैसा जुटा सकते हैं, बिना शेयरधारक की मंजूरी के.
व्यवहार में यह कैसे काम करता है? मान लीजिए आपके दोस्त ने एक टेक स्टार्ट‑अप शुरू किया और 40 % शेयर रखे। जब वे एंजल इन्वेस्टर को लाते हैं, तो वो देखेंगे कि मित्र का हाथ अभी भी कंपनी में है। इससे निवेशक को जोखिम कम लगता है और वे बड़े पैसों की पेशकश कर सकते हैं.
ध्यान रखें कि प्रमोटर होल्डिंग बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए. अगर संस्थापक के पास 80 % से अधिक शेयर हों, तो छोटे निवेशकों को डर लग सकता है – उन्हें लगता है उनके पास कोई आवाज़ नहीं होगी. इसलिए कई कंपनियां शुरुआती दौर में 30‑40 % रखती हैं और बाकी बाजार में बेच देती हैं.
एक और बात जो अक्सर पूछी जाती है, वह है ‘प्रमोटर होल्डिंग के नियम’. भारत में SEBI ने कहा है कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों को कम से कम 10 % प्रमोटर होल्डिंग बनाए रखना चाहिए. सार्वजनिक कंपनी के लिए यह प्रतिशत अलग‑अलग हो सकता है, लेकिन न्यूनतम मानक रहता है.
अगर आप एक नया उद्यमी हैं और सोच रहे हैं कि कितना हिस्सा रखना चाहिए, तो सबसे पहले अपने बिज़नेस प्लान को देखिए. अगर आपके पास मजबूत प्रोडक्ट है और जल्दी फंडिंग की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, तो कम हिस्सेदारी रखकर बाहर के निवेशकों को ज्यादा शेयर दे सकते हैं. लेकिन यदि शुरुआती चरण में भरोसे की कमी महसूस होती है, तो थोड़ा अधिक होल्डिंग रखना बेहतर रहता है.
अंत में यह कहना सही रहेगा कि प्रमोटर होल्डिंग सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि कंपनी की दिशा तय करने का उपकरण है. इसे समझदारी से इस्तेमाल करें और अपने व्यापार को आगे बढ़ाते रहें।
निफ्टी के कमजोर पड़ने के बावजूद भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के शेयर मूल्य में उछाल देखा गया। कंपनी की लाभप्रदता का संकेत देते हुए रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 21.53 प्रतिशत रहा। 31 मार्च 2024 तक प्रमोटरों की 51.14 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।