आपने शायद फ़िलीपींस की सुंदर समुद्री तटों या चिपचिपे फल‑जूस के बारे में सुना होगा, पर फ़िलीपीनी कलाकृति भी बहुत दिलचस्प है। यहाँ का रंग, बनावट और कहानियां अक्सर हमारे भारत से मिलती-जुलती लगती हैं—क्यों? क्योंकि दोनों जगह की संस्कृति आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। इस पेज में हम आपको सरल शब्दों में फ़िलीपीनी कला के मुख्य पहलुओं को समझाएंगे, ताकि आप अगली बार जब किसी गैलरी या फेस्टिवल में जाएँ तो पीछे न रह जाएँ।
फ़िलीपींस की परंपरागत कला के प्रमुख रूप
सबसे पहले बात करते हैं पारम्परिक शैलियों की। यहाँ का "बाना" (कपड़ा) बुनाई में जटिल डिज़ाइन होते हैं—गहरी लाल, पीली और नीली टोन अक्सर इस्तेमाल होती है। इनको स्थानीय भाषा में "इले-इलोको" कहते हैं, जिसका मतलब है "रंगों की बाती"। साथ ही, "हिंडसालिन" या लकड़ी के नक़्क़ाशी वाले बक्से भी काफी लोकप्रिय हैं; इन्हें दादा‑दादी अक्सर पूजा‑स्थल में रखते थे। इन कलाकृतियों का उद्देश्य सिर्फ सजावट नहीं बल्कि कहानी सुनाना भी है—जैसे नायक‑नायिकाओं की दंतकथाएँ या गांव के दैनिक जीवन को दर्शाना।
एक और अनोखी चीज़ "टिंकटिंग" नाम की तकनीक है, जहाँ पुराने कागज़ पर रंगीन पेन से छोटे-छोटे पैटर्न बनाए जाते हैं। यह कला स्कूलों में बच्चों को सिखाई जाती है, इसलिए हर घर के पास कम से कम एक टिंकटेड फ्रेम मिलता है। इन सब चीज़ों का मूल उद्देश्य लोगों की रोज़मर्रा की खुशी और कठिनाइयों को सुंदर रूप में पेश करना है।
आधुनिक फ़िलीपीनी कलाकारों का उभरता दृश्य
अब बात करते हैं आज के युवा कलाकारों की, जो सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय गैलरी तक अपना नाम बना रहे हैं। "जेसिका रोबिनो" जैसे चित्रकार अपनी पेंटिंग में परम्परा और डिजिटल तकनीक को मिलाते हैं—एक तरफ़ बैनर‑स्ट्रिप वाले रंगीन बैकग्राउंड, तो दूसरी तरफ़ एआई‑जनरेटेड पैटर्न। उनका काम अक्सर पर्यावरणीय मुद्दों पर केंद्रित रहता है, जैसे प्लास्टिक प्रदूषण या समुद्र की सफाई।
दूसरी ओर "मैक्स पावेलो" संगीत और ग्राफ़िक आर्ट को जोड़ते हैं; वह अपनी कॉन्सर्ट पोस्टर्स में फ़िलीपीनी लोकगीतों के रिद्म को आधुनिक बीट्स के साथ दिखाते हैं। इस तरह की मिश्रित शैली दर्शकों को नए तरीके से जुड़ने का अवसर देती है, खासकर युवा वर्ग को जो दो दुनियाओं को एक साथ देखना पसंद करता है।
फ़िलीपीनी कला में अब फ़ैशन भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। स्थानीय डिजाइनर "लिया सैंटोस" ने अपने कलेक्शन में बानाए हुए कपड़े, पारम्परिक मोटिफ और आधुनिक कट को मिलाया है—ऐसे जाकेट जो दिल्ली के फैशन शो में भी सराहा गया था। इस प्रकार कला सिर्फ दीवारों या गैलरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि रोज़मर्रा की पहनावा में घुली‑मिली है।
अगर आप फ़िलीपीनी कलाकारों को लाइव देखना चाहते हैं, तो साल के अंत में मनीला में "आर्ट फेस्टिवल 2025" होता है। इस इवेंट में पेंटिंग, स्कल्पचर और परफ़ॉर्मेंस आर्ट सब एक साथ मिलते हैं। टिकट ऑनलाइन बुक किए जा सकते हैं और कई वर्कशॉप भी मुफ्त में चलती हैं—इससे आप खुद हाथ आज़मा सकते हैं।
संक्षेप में कहा जाए तो फ़िलीपीनी कला परम्परा और नवाचार का संगम है। चाहे आप एक संग्रहकर्ता हों, छात्र हों या बस नई चीज़ें देखना पसंद करते हों, यहाँ हमेशा कुछ नया मिलता रहेगा। इस पेज को फॉलो करके आप हर ताज़ा अपडेट से जुड़ सकते हैं और अपनी अगली यात्रा में फ़िलीपीनी कला की झलक जरूर देखें।
मिस यूनिवर्स 2024 का शानदार मुकुट 'लूमियर डी ल’इन्फिनी’ फिलीपीन कारीगरों ने पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करके बनाया है। इसमें 23 दुर्लभ गोल्डन साउथ सी पर्ल्स जड़े हैं। यह केवल एक आभूषण नहीं बल्कि महिलाओं की हमेशा की सुंदरता और शक्ति का प्रतीक है, जो ग्लोबल स्तर पर फिलीपीन कला और प्रतिभा का जश्न मनाता है।