जब डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार रात को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित अपने भाषण में इरान से लंबे संघर्ष की चेतावनी दी, तो गुरुवार की सुबह वैश्विक ऊर्जा बाजारों में सनसनी फैल गई। ब्रेंट कच्चा तेल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों की कीमतों में तेजी आई, जिससे निवेशकों की सांसें थम गईं।
यह कोई मामूली उछाल नहीं था। ब्रेंट क्रूड की कीमत $105 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई, जबकि WTI ने $103 का नंबर छू लिया। वास्तव में, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, दिन भर के कारोबार के दौरान WTI की कीमत $111.29 तक पहुंच गई, जो कि एक दुर्लभ घटना थी जहां अमेरिकी क्रूड की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क से अधिक हो गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के बंद रहने और ट्रंप द्वारा दिए गए कठोर संदेश के कारण हुई।
बाजार में क्यों आई यह अफरातफरी?
सच कहें तो, निवेशक उम्मीद कर रहे थे कि ट्रंप का भाषण शांति की ओर一指 करने वाला होगा। लेकिन यही वह मुड़ता था जिसने सब कुछ बदल दिया। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम अगले दो से तीन हफ्तों में उन पर बेहद कड़ी धमाके करेंगे।" इस कथन ने बाजार में भय फैला दिया कि आपूर्ति में रुकावटें और बढ़ सकती हैं।
The Economic Times के अनुसार, ट्रंप के भाषण शुरू होने से पहले ही तेल की कीमतें गिर रही थीं, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी बात रखी, रुझान उलट गया। ब्रेंट क्रूड में 4% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि WTI में 3% की बढ़ोतरी हुई। Business Insider की रिपोर्ट के अनुसार, उस दिन ब्रेंट क्रूड लगभग 8% बढ़कर $109 प्रति बैरल पर ट्रेड हुआ, जो कि साल भर में 81% की वृद्धि है।
शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा?
तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अमेरिकी शेयर बाजारों पर पड़ा। गुरुवार की सुबह 9:30 बजे खुलते ही सभी प्रमुख सूचकांक नीचे की ओर मुड़े। S&P 500 1.3% गिरकर 6,489.55 पर आया। Dow Jones Industrial Average भी 599 अंक गिरकर 45,967.19 पर स्थिर हुआ। Nasdaq Composite सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जो 1.7% गिरकर 21,472.38 पर पहुंचा।
सरकारी बॉन्ड बाजार में भी हलचल देखी गई। 10-साल के अमेरिकी ट्रेजरी यिल्ड में 3 बेसिस पॉइंट की वृद्धि होकर 4.35% हो गया, जो यह संकेत देता है कि निवेशक उच्च मूल्य वृद्धि (inflation) के लिए तैयारी कर रहे हैं।
खपतकर्ताओं पर पड़ने वाला बोझ
यह सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं है। आम आदमी के लिए यह खबर चिंताजनक है। Rylice Radio की रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के बंद होने के छह सप्ताह में अमेरिकी गैसोलिन की कीमतें 39.7% बढ़ गई हैं। अब राष्ट्रीय औसत गैसोलिन की कीमत $4.08 प्रति गैलन हो गई है, जो कि पिछले 3.5 वर्षों में सबसे अधिक है।
NDTV Profit के एक विश्लेषक ने बताया कि आपूर्ति श्रृंखला में हुए नुकसान को ठीक होने में हफ्तों या महीनों लग सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति उपभोक्ता व्यय को नुकसान पहुंचाएगी, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा है।
भविष्य में क्या देखने को मिलेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष जारी रहा, तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। यूरोपीय डीजल फ्यूचर्स में 10% की वृद्धि होकर $1,500 प्रति टन हो गया, जो कि 2002 के बाद से सबसे अधिक है। यूरोपीय प्राकृतिक गैस फ्यूचर्स में भी 3% की वृद्धि दर्ज की गई।
अगले कुछ हफ्तों में बाजार की नजर ट्रंप की सरकार की नीतियों और इरान के साथ किसी भी समझौते की संभावना पर होगी। यदि आपूर्ति में सुधार नहीं होता, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
Frequently Asked Questions
ट्रंप के भाषण के बाद तेल की कीमतें क्यों बढ़ीं?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में इरान के खिलाफ अगले दो से तीन हफ्तों में कड़ी कार्रवाई की घोषणा की। इससे निवेशकों को लगा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के माध्यम से तेल की आपूर्ति में और रुकावटें आएंगी, जिसकी वजह से कीमतों में तेजी आई।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के बंद होने का क्या प्रभाव है?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ एक रणनीतिक जलमार्ग है जहां से विश्व का एक बड़ा हिस्सा तेल और LNG का व्यापार होता है। इसके बंद होने से आपूर्ति में कमी आई है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ी हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना है।
शेयर बाजार पर इसका क्या असर पड़ा?
तेल की बढ़ती कीमतों और युद्ध के भय के कारण अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट आई। S&P 500, Dow Jones और Nasdaq तीनों में 1.3% से 1.7% तक की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक मंदी और उच्च मूल्य वृद्धि के डर से सुरक्षित निवेश की ओर मुड़े।
आम जनता को इससे क्या असर होगा?
तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है। अमेरिका में गैसोलिन की कीमत $4.08 प्रति गैलन हो गई है, जो कि पिछले 3.5 वर्षों में सबसे अधिक है। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और सामान्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
भविष्य में तेल की कीमतों में और वृद्धि की संभावना है?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि इरान के साथ संघर्ष जारी रहा और आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आपूर्ति श्रृंखला में हुए नुकसान को ठीक होने में हफ्तों या महीनों लग सकते हैं।